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- श्री हनुमान मंदिर, ग्राम व पोस्ट - खेड़ा मस्तान , बुढाना- शामली रोड, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश - 247776
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मेरा नाम शिव राम ओझा है। बैरगाँव, कौशाम्बी का रहने वाला हूँ। मैं विगत कई वर्गों से हनुमान मेला खेड़ा मस्तान के विहाय में सुना करता था परन्तु कभी भी उस ओर ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2015 में जब मैं तीर्थराज प्रयाग के संगम तीरे कल्पवास कर रहा था तो फिर वहाँ खेड़ा मस्तान के चमत्कारी मेला के विाय में चर्चा सुनी जिससे मेरा भी मन उस अद्भुत मेला में जाकर खेड़ा मस्तान के श्री हनुमान जी का दर्शन करने की इच्छा जागृत हुई। यद्यपि मैंने अपने जीवन में न जाने कितने प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों व तीर्थों का भ्रमण किया उनकी तुलना में खेड़ा मस्तान का हनुमान मेला कुछ भी नहीं है । मन में यह सोचकर मैंने वहाँ जाने का कभी निश्चय नहीं किया। परन्तु 'हरि इच्छा भावी बलवाना' की कहावत उस वक्त चरितार्थ हुई जब मैं पिछले वर्ष 2015 के हनुमान मेला में अपने अन्य साथियों के साथ खेड़ा मस्तान पहुँच गया। वहाँ पाँच दिनों तक मेले का अद्भुत दृश्यों का आनन्द लिया और यह अनुभव किया कि वास्तव में यहाँ हनुमान जी की कृपा बरसती है । वहाँ विभिन्न स्थानों से आये भक्तों से भी हनुमान जी के अद्भुत चमत्कारों को सुना । मेला में उपलब्ध पिछले कई वर्षों की पत्रिकाओं में छपे लेखों को भी पढ़ने का अवसर मिला जिसमें भक्तों ने अपने ऊपर हुई हनुमान जी की कृपा का उल्लेख किया था । वास्तव में सच्चे मन से जुड़ने वाले हर भक्त पर हनुमान जी की कृपा होती है। इसी परिप्रेक्ष्य में मेरे ऊपर भी इसी साल हनुमान जी की जो कृपा हुई उसका उल्लेख हनुमान भक्तों की आस्था और प्रबल हो इस उद्देश्य से करना अधिक समीचीन समझता हूँ।
नवम्बर 2015 में ग्राम प्रधानी का चुनाव होने वाला था। गाँव के कुछ लोगों ने मेरे परिवार से किसी को प्रधान बनाने का विचार किया । अन्त में मेरे भतीजे शिव कर ओझा की पत्नी को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया। जब बात मेरे संज्ञान में आयी तो मैं इसके पक्ष में नहीं था लेकिन बात पूरे गाँव में फैल चुकी थी । अब यह चुनाव परिवार की प्रति ठा का विाय बन चुका था। चुनाव नहीं लड़ा गया तो तौहिनी और लड़कर हार गये तो तौहिनी । कहने का तात्पर्य यह कि एक तरफ कुआँ और दूसरी तरफ खाई। मैंने अपने छोटे भाई को बुलाया और उन्हें समझाया कि आप प्रचार कार्य से दूर रहकर खेड़ा मस्तान के हनुमान जी के शरण में जायें । अब हम लोगों का वही कल्याण करेंगे। वह घर-द्वार छोड़कर सीधे खेड़ा मस्तान मुजफ्फर नगर पहुँचे और हनुमान जी के चरणों में अर्जी लगायी। उनके चरणों में रहकर 27 दिनों तक सेवा किया। इधर भतीजे के बहू ने प्रधानी का पर्चा भर दिया। प्रचार कार्य प्रारम्भ हुआ। विरोधियों ने हमें हराने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मेरे पक्के वोटरों के काफी नाम सम्बन्धित कर्मचारियों से मिलकर कटवा दिये गये। अब हार निश्चित थी। विरोधियों ने वोट पड़ने वाले दिन से पूर्व रात में एक बैठक किया और सारे विरोधियों ने ने हमें हराने के लिए एक जुट हो गये। सारे प्रत्याशियों ने मिलकर एक का समर्थन कर दिया । धन-बल- सुरा - सुन्दरी आदि वे सारे हथकण्डे अपनाये गये जो चुनाव जीतने के लिए एक दबंग अपनाता है। विरोधियों का ध्येय केवल हमें हराना था स्वयं को जिताना नहीं। इस बात की जानकारी जब हम लोगों को हुई तो सभी के हाथ-पैर फूल गये। अब हार निश्चित हो गयी थी। हमने सबको ढांढस बँधाया कि घबराने की कोई बात नहीं है। अब बस केवल एक ही विकल्प है खेड़ा मस्तान वाले हनुमान जी का स्मरण करो। जब हनुमान जी हमारे साथ हैं तो वह अपने भक्तों की लाज अवश्य बचायेंगे । बस हनुमान जी पर भरोसा रखो । मतदान के दिन वोट पड़ा फिर भी हमें अपना पलड़ा हल्का लग रहा था। शाम होते-होते मेरे पक्ष के लगभग 25-30 वोटर ऐसे आ गये जो गाँव से बाहर दूसरे प्रान्तों में रोजी-रोटी के लिए गये थे और जिनके आने की कोई उम्मीद नहीं थी। उनसे जब वार्ता हुई तो उन लोगों ने बताया कि बस मन में आया कि गाँव चलकर वोट दें आयें। अब लड़ाई काँटे की हो चुकी थी । फिर भी मेरे समर्थक और परिवार के लोग निराश थे। मतगणना होने से पूर्व ही हार को स्वीकार करने लगे । लेकिन मुझे तथा मेरे छोटे भाई जो खेड़ा मस्तान जाकर हनुमान जी के चरणों में 27 दिन तक अर्जी लगाये थे निराश नहीं हुए। हम लोगों को पूरा भरोसा था कि हनुमान जी हम लोगों को अवश्य जितायेंगे चाहे वह एक ही वोट से क्यों न हो ।
13 दिसम्बर 2015 को मतगणना हुई । समय बीतने के साथ-साथ वहाँ उपस्थित सभी समर्थकों के हृदय की धड़कने बढ़ने लगी । मतगणना पूरी हुई। मेरी बहू 27 वोट से विजयी घोळत की गयीं यह जीत खेड़ा मस्तान के हनुमान जी का कृपा का प्रसाद है। उन्होंने हमारे परिवार की प्रतिष्ठा बचाई। हम अपने परिवार व समर्थकों के साथ उनको बारम्बार प्रणाम करते हैं।
- शिवराम ओझा, बैरगाँव, कौशाम्बी, मो0-7073298598
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