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- श्री हनुमान मंदिर, ग्राम व पोस्ट - खेड़ा मस्तान , बुढाना- शामली रोड, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश - 247776
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कौन नही कहता है कि आज के युग में सरकारी नौकरी पाना कठिन ही नहीं बल्कि सामान्य परिथिति में असम्भव है । हाँ अगर किसी किस्मत वाले को मिलती भी है तो रिश्वत देने के लिए धन तथा राजनेता की सिफारिश अलग से होना चाहिए बिना इसके सरकारी नौकरी की कल्पना भी नहीं करनी चाहिए ऐसी आम लोगों की धारणा है । परन्तु प्रयास के प्रयास ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया ।
मैं गाँव खेड़ा मस्तान का रहने वाला हूँ, नाम है प्रयास मलिक । मेरे पिता जी चौ० भीम सिंह मलिक आर्मी से सेवा निवृत्त हो चुके हैं। 27 जुलाई 1993 को जब मेरा जन्म हुआ तो मेरे पिता जी बहुत खुश हुए । उनकी हार्दिक इच्छा थी कि मैं बड़ा होकर देश की सेवा करूँ, परन्तु विधि का विधान कोई टाल नहीं सकता। जब मैं पाँच व का था तभी मेरे सिर से उनका साया उठ गया । मेरा लालन-पालन मेरे चाचा श्री ऋपाल के ऊपर आ गया। मेरे गाँव में एक सिद्ध हनुमान जी का मंदिर है। पिता जी के स्वर्गवास के बाद जब मुझे मौका मिलता तो मैं मंदिर पर जाता और बिना कुछ सोचे-समझे पिता जी को याद करके घण्टों रोता और सिर्फ रोता । मुझे इतना ज्ञान नहीं था कि अब पिता जी कभी नहीं मिलेंगे । मेरी पढ़ाई-लिखाई का क्या होगा? पिता का प्यार कहाँ मिलेगा । मेरे लिए दुनिया तून्य हो चुकी थी। मेला में दिये गये प्रवचन को ध्यान से सुनता । इससे मेरा ज्ञान बढ़ने लगा। एक दिन मुझे पिता जी की आखिरी इच्छा की जानकारी हुई। वे मुझे देश की सेवा लिए फौज में भेजना चाहते थे। मैंने सोचा अपने जीते जी पिता जी की सेवा तो न कर सका परन्तु उनकी आखिरी इच्छा को पूरा कर सकूँ तो यही मेरे लिए पितृ - सेवा होगी। जब अगली फरवरी में गाँव के मेला में गया तो वहाँ देखा कि इलाहाबाद से अंकल जी आये हैं सब लोग उनको मिश्रा जी कहकर पुकारते थे। उन्होंने मेला में बताया कि जिसको जो कुछ माँगना हो मेला में तीन दिन सच्चे मन से घी का दीया हनुमान जी के सामने जलाकर उनसे माँगें उसकी माँग को हनुमान जी जरूर पूरा करेंगे। मेला में मैंने भी तीन दिन घी का दीया जलाया और हनुमान जी से प्रार्थना किया कि मुझे फौज में भर्ती करा दो जिससे मैं अपने पिता की आखिरी इच्छा को पूरी कर सकूँ। इसके अलावा अब मैं मेला के बाद रोज मंदिर पर जाता और हनुमान जी को याद दिलाता । पूरा साल बीत गया परन्तु मुझे फौज में भर्ती होने के लिए सरकार ने नहीं बुलाया। अगले साल पुनः मेला आ गया परन्तु मैं फौज में भर्ती न हो सका । मुझे बहुत गुस्सा आया । मेला में मैं पहले दिन गया और हिम्मत करके मिश्रा अंकल से मिला । उनसे बोला कि तुम झूठे हो, तुम्हारा हनुमान झूठा है। मैंने पिछले साल मेला में घी का दीपक जलाया था और माँगा था कि मेरी नौकरी फौज में लग जाये परन्तु नहीं लगी । अंकल तुम झूठे हो । मिश्रा अंकल ने मुझे बुलाकर अपनी गोद में बैठाया और बड़े प्यार से पूछा कि बेटा किस कक्षा में पढ़तें हो। मैंने कहा कक्षा दो में। उन्होंने मेरी आँखों में देखा फिर सिर पर हाथ फेरा और कहा बेटा अभी तुम छोटे हो जब कक्षा 12 पास कर लोगे तब हनुमान जी तुमको फौज में भर्ती करा देंगे। बस तुम हनुमान जी की सेवा करते रहो। हर साल मेला में आकर दीपक जलाते रहो। उसके बाद से मैं प्रतिदिन हनुमान जी की आरती में आने लगा। हर साल मेला में आता रहा और फौज में भर्ती होने की प्रार्थना करता रहा । सन् 2012 में जब मैंने इण्टर पास किया तो मुझे पूर्ण विश्वास हो गया कि अब हनुमान जी मुझे फौज में भर्ती करा देंगे। मैं हनुमान जी पर भरोसा करके फिजिकल की तैयारी करने लगा। सन् 2012 में जब फौज से वेकेंसीज निकली तब मैंने वहाँ फार्म भरा। उसके सारे टेस्ट के लिए जब मैं जाता खेड़ा मस्तान के हनुमान जी को मन ही मन स्मरण करता रहता। सभी टेस्ट में पास होता गया और अन्ततः मुझे फौज में नौकरी मिल गयी। मैं अपने पिता के संकल्प को पूरा कर सका । सितम्बर 2013 में मैंने जिला बरेली में इन्डियन आर्मी के सिपाही पद पर भर्ती हो गया। अब मुझे खेड़ा मसस्तान के हनुमान जी व मिश्रा अंकल पर पूरा विश्वास हो गया है। नौकरी मिलने के बाद मैंने मिश्रा अंकल के पैर छूए और कहा कि आप सच्चे हैं और आपके हनुमान जी सच्चे हैं ।
- प्रयास मलिक, खेड़ा मस्तान, मु0 नगर मो0-8859219272
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