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- श्री हनुमान मंदिर, ग्राम व पोस्ट - खेड़ा मस्तान , बुढाना- शामली रोड, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश - 247776
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मनुष्य के जीवन में बहुत सी ऐसी घटनाये घटती हैं जिनको बताने पर किसी को विश्वास नही होता। इस वैज्ञानिक युग में लोग देवी - देवता की पजूा को हँसी-मजाक मे लेते हैं परन्तु वह व्यक्ति जिसके साथ घटना घटित होती है वह दैवी कृपा को कैसे झुठला सकता है?
मेरा नाम मनोज कश्यप है । गाँव बसधाड़ा जिला मुजफ्फर नगर का रहने वाला हूँ और वहीं के सरकारी स्कूल में अध्यापक हूँ । भगवान की कृपा से मेरे धौरे ( पास में) सब कुछ था परन्तु कोई वारिस नहीं था। बेटे की चाह मे हर उस दरवाजे पर दस्तक दी जहाँ से कोई उम्मीद की लौ नजर आ सकती थी लेकिन निराश ही होना पड़ा। हाँ, इस भाग-दौड़ मे कुछ हाथ लगा तो वह था विशाल हनुमान मेला खेड़ा मस्तान की एक पत्रिका, जिसका मूल मंत्र है हनुमान मेला मे सच्चे मन से तीन दिन घी का दीपक जलाकर अपनी कामना को पूरा करना । पत्रिका में कई लोगों के अनुभव प्रकाशित थे। मैं तो थका हारा मुसाफिर था, पुत्र की चाह छोड़ चुका था । पर मन नहीं माना सोचा जहाँ लाखों रूपये खर्च हो चुके हैं एक प्रयास और सही। एक एसेा प्रयास जिसमें खर्च के नाम पर कुछ भी नहीं है। केवल सच्चे मन से दीपक जलाकर हनुमान जी की कृपा ही तो लेना है। फरवरी 2013 के मेला में मैं खेड़ा मस्तान गया। तीन दिन घी का दीपक जलाया और पुत्र देने की हनुमान जी से प्रार्थना किया। हनुमान जी की कृपा से पत्नी के गर्भ मे नन्हें शिशु का आगमन हुआ। परिवार मे खुशी की लहर दौड़ गयी परन्तु यह खुशी कुछ महीनों के लिए थी । आठवाँ महीना पूरा होते ही घर में मायूसी छा गयी। परीक्षण के उपरान्त डॉक्टर ने बताया कि बालक उल्टा हो चुका है। पत्नी की हालत धीरे-धीरे गम्भीर हो गयी। डॉक्टरो की टीम ने परीक्षण करके बताया कि मेजर आपरेशन करना पडगे II माँ-बेटे में से एक को ही बचाया जा सकता है। मैंने सोचा इससे अच्छा तो यही था कि यह शिशु पेट में ही न आता। कम से कम यह दुःख तो न देखना पड़ता । अब मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था कि क्या करूँ? मैं निराश होकर हास्पिटल से सीधे खेड़ा मस्तान पहुँचा । हनुमान जी के चरणो मे घी का दीपक जलाकर हृदय से प्रार्थना किया । वहाँ से लौटकर जब पुनः हास्पिटल पहुँचा तो पता चला कि पत्नी आपरेशन रूम है इतना ही नहीं उसने बिना आपरेशन किये नार्मल तौर से एक पुत्र को जन्म दिया। दूसरे दिन मैं पुनः खेड़ा मस्तान गया और हनुमान जी के चरणो में गिर कर धन्यवाद दिया और घी का दीपक जलाया। मेला के सचिव को आप बीती घटना से अवगत कराया। उन्होनं कहा कि यहाँ के हनुमान जी के द्वार पर जो अपने को समर्पित कर देता है उसे
कभी निराश नहीं होना पडता। हनुमान जी ने हमारे जीवन में रोशनी भर दिया इसलिए मैंने उस बालक का नाम हनु प्रकाश रख दिया ।
-मनोज कुमार कश्यप, बसधाड़ा, मु0 नगर मो0–8923388722
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