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- श्री हनुमान मंदिर, ग्राम व पोस्ट - खेड़ा मस्तान , बुढाना- शामली रोड, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश - 247776
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मेरा नाम सतपाल है। मैं गाँव भौंरा कला जिला मुजफ्फर नगर का रहने वाला हूँ। पाँच वर्ता की अल्पायु में ही मैं पैर से विकलांग हो गया। मेरे पिता जी निराश हो गये कि अब मैं अपने जीवन में क्या कर पाऊँगा । पढ़ने-लिखने में मेरा मन नहीं लगता था। हाँ, माता-पिता जी के साथ माँ दुर्गा की आरती जरूर करता था। मेरे गाँव में एक कीर्तन पार्टी थी जिसमें मैं गाता रहता था। लगभग 30 साल पहले की बात है । हनुमान मेला खेड़ा मस्तान में श्री रवि नारायण मिश्रा जी कीर्तन प्रतियोगिता करवाते थे। मेरे कीर्तन पाटी को भी आमंत्रित किया गया। जब मैं वहाँ पहुँचा तो देखा कि मेरे अलावा भी सात - आठ कीर्तन पार्टियाँ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मौजूद हैं। उनको देखकर मैं हिम्मत हार गया। मन में आया कि उनके आगे मैं अभी बच्चा हूँ । अतः प्रतियोगिता में भाग लेने का विचार छोड़ दिया । इसी बीच पूज्य मिश्रा जी ने माइक लेकर स्टेज पर एनाउन्स किया कि जो जो भी व्यक्ति हनुमान मेला में सच्चे मन से श्रद्धा और भक्ति के साथ घी का दीपक जलाता है उसकी मनोकामना बाबा बजरंगबली पूर्ण करते हैं। बस मेरे मन में एक जोश आ गया। मैंने हनुमान जी के चरणों में घी का दीपक जलाया और सच्चे मन से एक बड़ा सिंगर बनने की कामना किया। दीपक जलाने के बाद मैंने भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए इन्ट्री करा दिया । तीनों दिन रह कर पूरे विश्वास के साथ दीपक जलाया । वाह ! हनुमान जी ने मेरी वाणी में ऐसी मधुरता ला दी कि मेरे गाये हुए सभी भजन लोगों को दीवाना कर दिया। मुझे प्रतियोगिता में विजेता किया गया। उस दिन से लोग मुझे "सतपाल दिवाना' के नाम से पुकारने लगे। हनुमान जी के दीपक का यह चमत्कार देखकर मैं पूर्णरूप से उनको समर्पित हो गया। उसके बाद मैं आस-पास के गाँवों की बहुत सी कीर्तन प्रतियोगिताओं में भाग लेता रहा और सभी में विजेता किया जाता रहा। हाँ एक बात का मैं विशेा ध्यान रखता था कि जब कभी मैं किसी प्रतियोगिता में भाग लेने जाता तो घर पर ही खेड़ा मस्तान वाले हनुमान जी को घी का दीपक जलाकर उनका स्मरण करना नहीं भूलता था । गाँव फुगाना में जब मैंने आखिरी बार कीर्तन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया तो गाँव के लोगों ने मुझे "सतपाल सितारा' के खिताब से सम्मानित किया । यह सब खेड़ा वाले बाबा की कृपा का फल था, उसके बाद मैं दिल्ली चला गया।
दिल्ली जाने के बाद खेड़ा मस्तान के हनुमान जी को मैं भूला नहीं, प्रतिदिन उनकी प्रतिमा के आगे दीपक जलाकर पूजा करता रहा। हनुमान मेला में भी आता रहा। दिल्ली में मेरे भजन की धूम होने लगी जिसके परिणाम स्वरूप बड़े-बड़े गायक कलाकारों के सम्पर्क में आ गया। हनुमान जी की कृपा से एक बड़ा सिंगर बनने का सपना साकार होता जा रहा था। कुछ दिनों के बाद मेरी मुलाकात जागरण लाइन के गुरूवानी महन्त शिरोमणि श्री ओम नाथ शर्मा जी से हुई और मैं उनका शि य बन गया। वो एक महान हस्ती हैं जिन्हें जागरण लाइन के बड़े-बड़े कलाकार आदर के साथ शीश झुकाते हैं। हनुमान जी की कृपा से सिसोदिया कैसेट कम्पनी में "राम नाम का प्याला' सी० डी० व दिव्य चैनल पर लखवीर सिंह लख्खा व श्री नरेन्द्र चंचल जी के साथ कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरे गुरू जी ने मेरी प्रगति देखकर बाणधारी लाल पगड़ी पहनाकर मुझे महन्त बना दिया । सच्ची प्रीति के कारण खेड़ा मस्तान के हनुमान जी व माता दुर्गा जी की कृपा तथा पूज्यनीय माता-पिता जी व इलाहाबाद वाले मिश्रा जी की कृपा से आज मेरे पास वह सब कुछ है जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी । मेरी कोई माने तो मैं यही कहूँगा कि हर व्यक्ति को एक बार खेड़ा मस्तान के मेला में जाकर हनुमान जी की कृपा जरूर लेनी चाहिए।
- सतपाल सितारा, दिल्ली, मो0- 9818116225
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